Padosi Ladke Se Ki Chudai
मेरे प्रिय दोस्तो, मेरा नाम रितिका सैनी है यह मेरी कहानी का तीसरा भाग है अगर आपने मेरी पिछली कहानी के दो भाग नही पढ़े है तो जरूर पढ़ ले आपको यह कहानी पढ़ने में आसानी होगी.
स्टोरी का पहला भाग :- स्कूल में पहला सेक्स किया हैंडसम लड़के को पटाकर
स्टोरी का दूसरा भाग :- हैंडसम लड़का पटाकर चूत चुदाई के बाद गांड मरवायी
अब आगे :-
रवि चुदाई तो मेरी रोज़ करता था पर तस्सली से नही. बस अपना पानी निकाल कर सो जाते थे. मैं भी प्यासी ही सो जाती.एक तो चूत की प्यास और फिर सारा दिन घर पर भी अकेली ही रहती थी ।
मैं अपने पति रवि से कहकर कुछ दिनों के लिए अपने घर जाना चाहती थी तो रवि ने मुझे अकेले जाने के लिए कहा. क्योकि बैंक से वह ज्यादा दिन की छुटि नही ले सकते थे. तो उन्होंने मेरे साथ आने से मना कर दिया.
मैंने भी अकेले जाने का मन बना लिया और अपने आने की खबर अपने घर पर बताई घर वाले बहुत खुश हुए.
अगले दिन मेरे पति मुझे बस में बैठा कर चले गए. रास्ता कुछ तीन घंटे का था बस से उतरकर फ़ोन किया तो मुझे लेने मेरे पिता जी आ गए .घर पर पहुँची माँ से मिली उनसे कुछ देर बात की और फिर अपने कमरे में आराम करने चली गई.ज्यादा थक जाने की वजह से मैं लेटते ही सो गई.
सुबह लेट उठी पिता जी अपने काम पर जा चुके थे. उठकर सीधा मैं नहाने चली गयी और नहाने के बाद खाना खाकर मैं छत पर चली गयी. घर के साथ में जो घर था वहाँ पर शालू आंटी कपड़े सूखा रही थी जो मेरी माँ की काफी अच्छी सहेली भी थी ओर उनका लड़का जो पढ़ने के लिए बाहर गया हुआ था वह अपने फ़ोन में लगा हुआ था उसका नाम हर्ष था मैंने उसको काफी समय बाद देखा था वह बचपन में मुझे दीदी कहकर बुलाता था हर्ष ने मुझे देख हेलो दीदी कहाँ और फिर अपने फ़ोन में लग गया. आंटी मेरे पति रवि के बारे में पूछने लगी. थोड़ी देर बाते करने के बाद मैं नीचे चली गयी.शाम को मैं अपनी माँ के साथ गली में कुर्सी पर बैठी थी ।
हर्ष अपनी एक्टिवा पर जा रहा था वो मुझे देख बोला आओ दीदी बाजार घूमने चलते है मुझे उसकी नज़र में कोई कमीनापन नज़र नही आ रहा था । मैं भी बिना कुछ सवाल किए . अपना पर्स लेकर उसके साथ चल दी तो मैं जैसे ही पीछे बैठने लगी तो वो बोला कि लो दीदी आप चलाओ ।
तो मैंने कहाँ मुझे तो चलानी ही नही आती तो वह बोला की कोई नही मैं सीखा दुँगा.शाम का टाइम था शाम के टाइम काफी भीड़ भी होती है तो मैंने उसे मना कर दिया तो फिर हर्ष बोला की मैं आपको सुबह-सुबह सीखा दुँगा । मैं ठीक है कहकर उसके पीछे बैठ गयी ओर हम बाजार घूमने के लिए निकल गए.
हर्ष ने घर के लिए कुछ सामान खरीदा फिर मैंने और हर्ष ने गोलगप्पे खायें और घर के लिए निकल दिए अंधेरा हो चुका था हर्ष एक्टिवा बहुत धीमे चला रहा था ओर मुझसे बाते करता चल रहा था ।
हर्ष ने मुझसे माजक में पूछा :- दीदी जीजा जी के क्या हाल है ।
मैं :- थोड़ा निराश स्वर में बोली ठीक ही है ।
हर्ष मेरे मुँह से ऐसी निराशा भरी आवाज़ से अपनी एक्टिवा साइड में रोक कर पीछे मुड़ कर मजाक में पूछने लगा.क्यो क्या हुआ वह आपको रात को खुश नही रखते क्या । मैंने शर्माकर उसकी कमर पर हल्का सा थपड मार दिया और उसे घर चलने को कहाँ वह फिर से मज़ाक में बोला कभी मेरी जरूरत हो तो बताना मैं आपको बिल्कुल खुश कर दुँगा ओर यह कहकर उसने एक्टिवा स्टार्ट कर ली और घर की तरफ चल दिया. हालांकि उसने कहा तो मजाक में ही था पर यह बात मैं सारे रास्ते सोचती रही मुझे भी एक लंड की तलाश थी और यह सोचते-सोचते हम घर पहुँच गए. वह मुझसे जाते हुए बोला कि सुबह तयार रहना अगर आपको एक्टिवा सीखनी हो तो.
मैंने कहा ठीक है सुबह आ जाना पाँच बजे. वह ठीक है कहकर अपने घर चला गया जो मेरे घर के पीछे ही था. मैं घर मे गयी और अपनी माँ से बाते करने लगी पापा भी आ चुके थे. कुछ देर बाते की ओर खाना खा कर अपने कमरे में चले गयी ।
मैंने अपने कपड़े बदले और अपने पति से कुछ देर बाते करने के बाद मैं सोने की तयारी करने लगी पर मुझे नींद नही आ रही थी सिर्फ हर्ष की कही हुई बात सिर में घूम रही थी । यह सोचते-सोचते मैं कब सो गई पता ही नही चला सुबह सवा पाँच बजे के आस-पास डोरबेल बजी माँ ने गेट खोला तो देखा कि हर्ष खड़ा था .माँ ने हर्ष से पूछा की इस टाइम क्या काम है बेटा तो हर्ष बोला की दीदी एक्टिवा सीखने के लिए कह रही थी माँ बोली की अभी तो रितिका सो रही है जाओ उठा दो जाकर हर्ष यह यह सुनकर सीधा मेरे कमरे में आ गया मैं उल्टी पेट के बल लेटी हुई थी जिस से उसको मेरी उभरी हुई गांड दिखी ओर वह पजामे के ऊपर से ही बिल्कुल आराम से मेरी गांड दबाने लगा. मैं हल्की नींद में थी मुझे बहुत मज़ा आ रहा था फिर सोचा घर पर तो माँ और पिता जी के अलावा कोई है नही तो ये कौन हैं मैं एक दम से उठी और उसको देखकर खुश हुई और उसकी इस हरकत से मुझे अच्छा भी लगा । मैंने थोड़ा स्माइल फेस से हर्ष को कहा की तुम क्या कर रहे थे वह बिना घबराएं बेशर्मी के साथ बोला मुझे आपके शरीर मे आपकी गांड सबसे ज्यादा अच्छी लगती है क्या साइज है वैसे आपकी गांड का. मैंने बात को टालते हुए कहा जाओ एक्टिवा निकाल लो इतने मैं मुँह धोकर आती हूँ । वह निराश सा नीचे मुँह करके चला गया मैं मुँह धोकर बाहर निकली तो वह बाहर खड़ा था मेरे बाहर आते ही वह पीछे हो गया और मुझे आगे बैठने के लिए कहा । मैं बैठ गयी हर्ष ने मेरे हाथों के नीचे से अपने हाथ निकाल कर हैंडल पकड़ लिया । और मुझसे बिल्कुल चिपक गया हल्के हल्के उसका लंड मुझे अपनी गांड पर बड़ा होता हुआ महसूस हो रहा था ।
मैंने एक्टिवा स्टार्ट करी ओर हम अब गलियों से बाहर निकलकर रोड पर आ गए आसपास कोई दिखाई नही दे रहा था अभी तक अंधेरा भी था. फिर उसने अपना मुँह मेरी कंधे पर रखा और उसके गाल से मेरे गाल चिपक रहे थे । फिर उसने मेरे को चलाने के लिए कहा मैं बिल्कुल आराम से चला रही थी क्योंकि मुझे साईकल चलानी आती थी तो बैलेंस करने में इतनी दिक्कत नही हुई वह मुझसे चिपक कर बैठा था उसके चिपकने से मुझे अच्छा लग रहा था उसका लंड मेरी गांड पर दस्तक दे रहा था मुझे अपनी गांड पर उसका खड़ा लंड महसूस हो रहा था. उसके लंड के अहसास से मेरी चुत भी पानी छोड़ रही थी । घर से करीब हम पाँच किलोमीटर दूर आ गए थे हर्ष ने अपने हाथ आगे बढ़ाए ओर एक्टिवा को रोड से थोड़ा सा साइड में रोका और उतर कर पेसाब करने लगा । मैं उसका लंड देखना चाहती थी और शायद वो भी मुझे अपना लंड दिखाना चाहता था । अंधेरे की वजह से मैं इतना साफ नही देख पा रही थी । वह अपना लंड हाथ मे पकड़ कर घूम गया और जैसे ही पजामे को ऊपर करने लगा पीछे से आ रहे ट्रक की हेड लाइट से मुझे उसका लंड दिख गया । मैं उसका लंड देखकर मुस्करा दी और एक्टिवा स्टार्ट करी और फिर से एक्टिवा चलाने लगी कुछ देर चलाने के बाद हम घर की तरफ जाने लगे उसके लंड की तस्वीर मेरे दिमाग मे छप चुकी थी और पीछे से हर्ष आराम-आराम से अपना लंड मेरी गांड पर घिस रहा था. मैं जल्दी घर पहुँचना चाहती थी मेरी चुत बिल्कुल तेज़ी से गीली होती जा रही थी । मैं घर जाकर अपनी चुत को शांत करना चाहती थी हम घर पहुँच गए हर्ष अपने घर चला गया और मैं जल्दी से बाथरूम में घुस गई जाते ही अपने सारे कपड़े निकाल लिए और अपनी चिकनी चुत पर हाथ घुमाने लगी और चुत के दाने के साथ मज़ा करने लगी कुछ ही देर में मैं झड़ गई और अपनी चुत को धोकर आराम करने अपने कमरे में चली गयी.करीब एक घंटे बाद उठी,फ्रेश हुई,नहाई और खाना खाकर फिर से आराम करने अपने कमरे में चली गयी पिता जी काम पर चले गए मेरी माँ घर के काम निपटा कर साथ वाले घर (यानी हर्ष के घर) चली गयी मेरी माँ की और हर्ष की माँ यानी शालू आंटी के साथ ज्यादा अच्छी बनती थी । हर्ष मेरी माँ को अपने घर देखकर खुश हुआ और सोचा की रितिका अब अकेली होगी घर पर और सीधा मेरे घर आ गया ।
मैं भी जैसे उसका ही इंतज़ार कर रही थी । वह सीधा मेरे कमरे में आ गया और मेरे साथ बेड पर आकर बैठ गया वह काफी मजाक कर रहा था और माजक-मजाक में मुझे छूने लगा मुझे भी मज़ा आ रहा था मेरे शरीर के स्पर्श से उसको भी खुशी मिल रही थी और उसकी खुशी उसके पजामे में से बड़ी होती दिखाई दे रही थी । वह मुझसे हँसी मजाक कर रहा था मैंने भी मजाक में हँसकर उसके जांघ से थोड़ी सी दूरी पर हाथ रख दिया । उसका लंड उछाल मार रहा था .पजामे के ऊपर से मैंने हल्का सा उसके लंड को हाथ लगाया और कहा काफी शैतान हो गया है तुम्हारा एनाकॉन्डा । उसने कहा हाँ काफी दिनों से बिल नही मिला इसे । मैंने कहाँ तो करा दो इसको बिल की सैर तो उसने मेरे हाथ को पकड़ कर बड़े प्यार से अपने लंड परराख दिया और मुझसे पूछा क्या तुम अपने बिल की सैर कराने का मौका इसे दोगी ।
मैं भी यही चाहती थी । मैं उसकी इस बात पर शर्मा गयी । हर्ष थोड़ा सा उठा और उसने पजामे के साथ अपना अंडरवियर भी एक साथ उतार दिया उसका लंड मेरे सामने था मैं बेड पर आराम से लेटी हुई थी वह खड़ा हुआ और हल्का सा झुक कर लंड को मेरे मुँह के पास लेकर खड़ा हो गया मैंने बिना देरी किये उसका लंड लेटे-लेटे ही मुँह में ले लिया । वह मेरे मुँह को चोदने लगा । मैं बिल्कुल रिलैक्स लेटी हुई थी फेर उसने अपना हाथ बढ़ा कर मेरी चुत पर रख दिया और चुत पर हाथ घुमाने लगा मुझे बहुत मजा आ रहा था । वह अब मेरे मुँह को जल्दी-जल्दी चोदने लगा और अपना सारा वीर्य मेरे मुँह में ही छोड दिया मैं उसके वीर्य को एक रण्डी की तरह पी गई । मैंने उसका लंड चाट कर साफ कर दिया और वह अब मेरी चुत की तरफ बढ़ने लगा और मेरी लोअर को उतार दिया मैंने आपको पहले भी बताया था की मुझे अपनी चूत पर बिल्कुल भी बाल पसन्द नही है मैं हर पंद्रह से बीस दिन में अपने बाल साफ करती थी । उसने जैसे ही मेरी चूत को देखा उसने अपने हाथ की सबसे बड़ी वाली उँगली मेरी चूत की लकीर पर मसली और उंगली को अंदर डाल दिया और बाहर निकाल कर उँगली पर लगे मेरे पानी को चाट गया । फिर झुक कर अपनी जीभ से मेरी चुत की चुदाई करने लगा । मेरा बस होने ही वाला था की एक दम से गेट खुलने की आवाज आई हम दोनों हड़बड़ा गए मैंने जल्दी से अपने लोअर को ऊपर किया हर्ष साइड में बैठ गया मेरी माँ सीधा मेरे कमरे में आई उनको पता नही था की हर्ष घर पर हैं माँ हर्ष को देखकर बोली बेटा तुम कब आये हर्ष बस आंटी जी अभी आया हूँ फिर वह दूसरे कमरे में चली गयी ।
मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था . हर्ष मेरी हालत देखकर बोला कोई नही दीदी रात को छत पर आ जाना ये कहकर उसने अपना नंबर मुझे दिया और अब मैं रात का इंतज़ार करने लगी । हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था मैं छत पर पहले ही जाकर खड़ी हो गयी मैंने हर्ष को फ़ोन करके ऊपर बुलाया वह भी जल्दी से ऊपर आ गया वह अपनी छत से कूदकर मेरी छत पर आ गया अभी अंधेरा नही हुआ था तो वह मुझसे बात करने लग गया ।
हर्ष :- आज काफी दिनों बाद बहुत अच्छा लगा ।
मैंने गुस्से में कहा तुम्हारा तो हो गया पर मेरा क्या ।
हर्ष बात को काटते हुए बोला दीदी आज आपकी सारी ख्वाईश पूरी कर दुँगा ।
मैंने उसकी तरफ देखते हुए कहा देखते हैं तुम क्या कर सकते हो । बातों बातों में अंधेरा भी हो गया था उसने चारों तरफ देखकर मुझे दीवार पर लगाया ओर मुझे चूमने लगा और मेरी चुचिया दबाने लगा । मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी हमे ऊपर किसी का डर नही था हर्ष ने अपनी छत पर लगा दरवाजा बंद किया हुआ था । और मेरी माँ पैरो में दर्द होने की वजह से छत पर आती नहीं थी पापा अभी आये नही थे । हम बिना डरे मजे कर रहे थे थोड़ी देर बाद उसने मुझे घुमाया और हल्का सा झुका दिया और नीचे बैठ कर मेरे लोवर उतार दिया और अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया मुझे बहुत मज़ा आ रहा था । काफी देर बाद वह उठा और खड़ा होकर अपना भी लोअर उतार दिया और अपने खड़े लंड पर थूक लगाकर लंड को चूत पर लगाया और एक ही धक्के में पूरा लंड मेरी चुत में उतार दिया हाथों को आगे चुचियो पर लाते हुए जोर जोर से मसलने लगा जैसा इनमे से आज ही सारा दूध निकालेगा और पीछे से धक्के लगाने लगा मुझे बहुत दिनों बाद जबरदस्त लंड का मज़ा मिल रहा था . अगर हर्ष की जगह मेरे पति होते तो वह अब तक झड़ गए होते.हर्ष मुझे लंबी रेस का घोड़ा लग रहा था वह मुझे बहुत बुरी तरह से चोद रहा था मैं भी यही चाहती थी कि कोई मेरी चुत को तस्सली से चोदे और इसी बीच मेरा वीर्य छूट गया था जो मेरी चूत से होता हुआ नीचे टांगो तक आ रहा था पर हर्ष अभी भी मुझे बहुत तेज़ी से चोदे जा रहा था कुछ देर बाद मेरा फिर से हो गया और मेरी चुत में भी दर्द होने लगा था मैंने हर्ष का लंड को निकाला और नीचे घुटनो के बल बैठ कर उसके लंड को चूसने लगी हर्ष ने भी मेरे बालो को पीछे से जोर से पकड़ लिया और मेरे मुँह को चोदने लगा फिर मैं उठी और हर्ष को मेरी गांड पर थूक कर गिला करने के लिए कहा पर वह नीचे बैठ कर मेरी गांड में अपना मुँह डाल कर चाटने लगा और काफी सारा थूक मेरी गांड में छोड़ दिया और लंड को गांड के छेद पर लगाकर हल्के-हल्के से गांड में डालने लगा और लंड पूरा अंदर जाते ही वह मुझे फिर से तेज़ी से चोदने लगा । काफी देर की चुदाई के बाद मेरी टांगे भी दुखने लगी थी पर चूत की खुजली के सामने ये कुछ भी नही था
काफी देर बाद हर्ष की रफ्तार कम हो गयी । और बोला दीदी कहाँ छोडू तो मैंने कहा की चूत में छोड़ दो .वह इतना सुनते ही लंड निकाल कर चूत में डाल कर फिर से मुझे चोदने लगा । मुझे भी मजा आने लगा. कुछ मिनट बाद ही उसकी एक लंबी गर्म पिचकारी मुझे अपने अंदर महसूस हुई फिर तो बहुत सी पिचकारी मुझे अपने अंदर महसूस हुई पर हर्ष ने अभी धक्के मरना बंद नही किया था और साथ ही मैं भी झड़ गयी । थोड़ी देर बाद हर्ष का लंड छोटा होकर बाहर निकल गया हम दोनों ने अपने कपड़े सही करे । मैं काफी खुश थी मैंने कहा वाह हर्ष तुमने तो सही में आज कमाल कर दिया और मैं उसके गले लग गयी उसने भी मुझे बाहों में भर लिया और एक किस माथे पर करी ओर फिर मेरे होंठ चूसने लगा । फिर मैं उसे अलविदा कहकर नीचे आ गयी और अपने कमरे में लेट गयी । थोड़ी देर बाद पिता जी भी आ गए ।
फिर हम ने साथ में खाना खाया और मैं अपने बैडरूम में चली गयी । अपने पति से थोड़ी देर बात करके फिर करीब ग्यारा बजे तक हर्ष से फ़ोन पर बात करी । मैंने उसको कहा की सुबह आ जाना एक्टिवा लेकर । वह भी खुश हो गया और बोला ओक दीदी
स्टोरी का पहला भाग :- स्कूल में पहला सेक्स किया हैंडसम लड़के को पटाकर
स्टोरी का दूसरा भाग :- हैंडसम लड़का पटाकर चूत चुदाई के बाद गांड मरवायी
अब आगे :-
रवि चुदाई तो मेरी रोज़ करता था पर तस्सली से नही. बस अपना पानी निकाल कर सो जाते थे. मैं भी प्यासी ही सो जाती.एक तो चूत की प्यास और फिर सारा दिन घर पर भी अकेली ही रहती थी ।
मैं अपने पति रवि से कहकर कुछ दिनों के लिए अपने घर जाना चाहती थी तो रवि ने मुझे अकेले जाने के लिए कहा. क्योकि बैंक से वह ज्यादा दिन की छुटि नही ले सकते थे. तो उन्होंने मेरे साथ आने से मना कर दिया.
मैंने भी अकेले जाने का मन बना लिया और अपने आने की खबर अपने घर पर बताई घर वाले बहुत खुश हुए.
अगले दिन मेरे पति मुझे बस में बैठा कर चले गए. रास्ता कुछ तीन घंटे का था बस से उतरकर फ़ोन किया तो मुझे लेने मेरे पिता जी आ गए .घर पर पहुँची माँ से मिली उनसे कुछ देर बात की और फिर अपने कमरे में आराम करने चली गई.ज्यादा थक जाने की वजह से मैं लेटते ही सो गई.
सुबह लेट उठी पिता जी अपने काम पर जा चुके थे. उठकर सीधा मैं नहाने चली गयी और नहाने के बाद खाना खाकर मैं छत पर चली गयी. घर के साथ में जो घर था वहाँ पर शालू आंटी कपड़े सूखा रही थी जो मेरी माँ की काफी अच्छी सहेली भी थी ओर उनका लड़का जो पढ़ने के लिए बाहर गया हुआ था वह अपने फ़ोन में लगा हुआ था उसका नाम हर्ष था मैंने उसको काफी समय बाद देखा था वह बचपन में मुझे दीदी कहकर बुलाता था हर्ष ने मुझे देख हेलो दीदी कहाँ और फिर अपने फ़ोन में लग गया. आंटी मेरे पति रवि के बारे में पूछने लगी. थोड़ी देर बाते करने के बाद मैं नीचे चली गयी.शाम को मैं अपनी माँ के साथ गली में कुर्सी पर बैठी थी ।
हर्ष अपनी एक्टिवा पर जा रहा था वो मुझे देख बोला आओ दीदी बाजार घूमने चलते है मुझे उसकी नज़र में कोई कमीनापन नज़र नही आ रहा था । मैं भी बिना कुछ सवाल किए . अपना पर्स लेकर उसके साथ चल दी तो मैं जैसे ही पीछे बैठने लगी तो वो बोला कि लो दीदी आप चलाओ ।
तो मैंने कहाँ मुझे तो चलानी ही नही आती तो वह बोला की कोई नही मैं सीखा दुँगा.शाम का टाइम था शाम के टाइम काफी भीड़ भी होती है तो मैंने उसे मना कर दिया तो फिर हर्ष बोला की मैं आपको सुबह-सुबह सीखा दुँगा । मैं ठीक है कहकर उसके पीछे बैठ गयी ओर हम बाजार घूमने के लिए निकल गए.
हर्ष ने घर के लिए कुछ सामान खरीदा फिर मैंने और हर्ष ने गोलगप्पे खायें और घर के लिए निकल दिए अंधेरा हो चुका था हर्ष एक्टिवा बहुत धीमे चला रहा था ओर मुझसे बाते करता चल रहा था ।
हर्ष ने मुझसे माजक में पूछा :- दीदी जीजा जी के क्या हाल है ।
मैं :- थोड़ा निराश स्वर में बोली ठीक ही है ।
हर्ष मेरे मुँह से ऐसी निराशा भरी आवाज़ से अपनी एक्टिवा साइड में रोक कर पीछे मुड़ कर मजाक में पूछने लगा.क्यो क्या हुआ वह आपको रात को खुश नही रखते क्या । मैंने शर्माकर उसकी कमर पर हल्का सा थपड मार दिया और उसे घर चलने को कहाँ वह फिर से मज़ाक में बोला कभी मेरी जरूरत हो तो बताना मैं आपको बिल्कुल खुश कर दुँगा ओर यह कहकर उसने एक्टिवा स्टार्ट कर ली और घर की तरफ चल दिया. हालांकि उसने कहा तो मजाक में ही था पर यह बात मैं सारे रास्ते सोचती रही मुझे भी एक लंड की तलाश थी और यह सोचते-सोचते हम घर पहुँच गए. वह मुझसे जाते हुए बोला कि सुबह तयार रहना अगर आपको एक्टिवा सीखनी हो तो.
मैंने कहा ठीक है सुबह आ जाना पाँच बजे. वह ठीक है कहकर अपने घर चला गया जो मेरे घर के पीछे ही था. मैं घर मे गयी और अपनी माँ से बाते करने लगी पापा भी आ चुके थे. कुछ देर बाते की ओर खाना खा कर अपने कमरे में चले गयी ।
मैंने अपने कपड़े बदले और अपने पति से कुछ देर बाते करने के बाद मैं सोने की तयारी करने लगी पर मुझे नींद नही आ रही थी सिर्फ हर्ष की कही हुई बात सिर में घूम रही थी । यह सोचते-सोचते मैं कब सो गई पता ही नही चला सुबह सवा पाँच बजे के आस-पास डोरबेल बजी माँ ने गेट खोला तो देखा कि हर्ष खड़ा था .माँ ने हर्ष से पूछा की इस टाइम क्या काम है बेटा तो हर्ष बोला की दीदी एक्टिवा सीखने के लिए कह रही थी माँ बोली की अभी तो रितिका सो रही है जाओ उठा दो जाकर हर्ष यह यह सुनकर सीधा मेरे कमरे में आ गया मैं उल्टी पेट के बल लेटी हुई थी जिस से उसको मेरी उभरी हुई गांड दिखी ओर वह पजामे के ऊपर से ही बिल्कुल आराम से मेरी गांड दबाने लगा. मैं हल्की नींद में थी मुझे बहुत मज़ा आ रहा था फिर सोचा घर पर तो माँ और पिता जी के अलावा कोई है नही तो ये कौन हैं मैं एक दम से उठी और उसको देखकर खुश हुई और उसकी इस हरकत से मुझे अच्छा भी लगा । मैंने थोड़ा स्माइल फेस से हर्ष को कहा की तुम क्या कर रहे थे वह बिना घबराएं बेशर्मी के साथ बोला मुझे आपके शरीर मे आपकी गांड सबसे ज्यादा अच्छी लगती है क्या साइज है वैसे आपकी गांड का. मैंने बात को टालते हुए कहा जाओ एक्टिवा निकाल लो इतने मैं मुँह धोकर आती हूँ । वह निराश सा नीचे मुँह करके चला गया मैं मुँह धोकर बाहर निकली तो वह बाहर खड़ा था मेरे बाहर आते ही वह पीछे हो गया और मुझे आगे बैठने के लिए कहा । मैं बैठ गयी हर्ष ने मेरे हाथों के नीचे से अपने हाथ निकाल कर हैंडल पकड़ लिया । और मुझसे बिल्कुल चिपक गया हल्के हल्के उसका लंड मुझे अपनी गांड पर बड़ा होता हुआ महसूस हो रहा था ।
मैंने एक्टिवा स्टार्ट करी ओर हम अब गलियों से बाहर निकलकर रोड पर आ गए आसपास कोई दिखाई नही दे रहा था अभी तक अंधेरा भी था. फिर उसने अपना मुँह मेरी कंधे पर रखा और उसके गाल से मेरे गाल चिपक रहे थे । फिर उसने मेरे को चलाने के लिए कहा मैं बिल्कुल आराम से चला रही थी क्योंकि मुझे साईकल चलानी आती थी तो बैलेंस करने में इतनी दिक्कत नही हुई वह मुझसे चिपक कर बैठा था उसके चिपकने से मुझे अच्छा लग रहा था उसका लंड मेरी गांड पर दस्तक दे रहा था मुझे अपनी गांड पर उसका खड़ा लंड महसूस हो रहा था. उसके लंड के अहसास से मेरी चुत भी पानी छोड़ रही थी । घर से करीब हम पाँच किलोमीटर दूर आ गए थे हर्ष ने अपने हाथ आगे बढ़ाए ओर एक्टिवा को रोड से थोड़ा सा साइड में रोका और उतर कर पेसाब करने लगा । मैं उसका लंड देखना चाहती थी और शायद वो भी मुझे अपना लंड दिखाना चाहता था । अंधेरे की वजह से मैं इतना साफ नही देख पा रही थी । वह अपना लंड हाथ मे पकड़ कर घूम गया और जैसे ही पजामे को ऊपर करने लगा पीछे से आ रहे ट्रक की हेड लाइट से मुझे उसका लंड दिख गया । मैं उसका लंड देखकर मुस्करा दी और एक्टिवा स्टार्ट करी और फिर से एक्टिवा चलाने लगी कुछ देर चलाने के बाद हम घर की तरफ जाने लगे उसके लंड की तस्वीर मेरे दिमाग मे छप चुकी थी और पीछे से हर्ष आराम-आराम से अपना लंड मेरी गांड पर घिस रहा था. मैं जल्दी घर पहुँचना चाहती थी मेरी चुत बिल्कुल तेज़ी से गीली होती जा रही थी । मैं घर जाकर अपनी चुत को शांत करना चाहती थी हम घर पहुँच गए हर्ष अपने घर चला गया और मैं जल्दी से बाथरूम में घुस गई जाते ही अपने सारे कपड़े निकाल लिए और अपनी चिकनी चुत पर हाथ घुमाने लगी और चुत के दाने के साथ मज़ा करने लगी कुछ ही देर में मैं झड़ गई और अपनी चुत को धोकर आराम करने अपने कमरे में चली गयी.करीब एक घंटे बाद उठी,फ्रेश हुई,नहाई और खाना खाकर फिर से आराम करने अपने कमरे में चली गयी पिता जी काम पर चले गए मेरी माँ घर के काम निपटा कर साथ वाले घर (यानी हर्ष के घर) चली गयी मेरी माँ की और हर्ष की माँ यानी शालू आंटी के साथ ज्यादा अच्छी बनती थी । हर्ष मेरी माँ को अपने घर देखकर खुश हुआ और सोचा की रितिका अब अकेली होगी घर पर और सीधा मेरे घर आ गया ।
मैं भी जैसे उसका ही इंतज़ार कर रही थी । वह सीधा मेरे कमरे में आ गया और मेरे साथ बेड पर आकर बैठ गया वह काफी मजाक कर रहा था और माजक-मजाक में मुझे छूने लगा मुझे भी मज़ा आ रहा था मेरे शरीर के स्पर्श से उसको भी खुशी मिल रही थी और उसकी खुशी उसके पजामे में से बड़ी होती दिखाई दे रही थी । वह मुझसे हँसी मजाक कर रहा था मैंने भी मजाक में हँसकर उसके जांघ से थोड़ी सी दूरी पर हाथ रख दिया । उसका लंड उछाल मार रहा था .पजामे के ऊपर से मैंने हल्का सा उसके लंड को हाथ लगाया और कहा काफी शैतान हो गया है तुम्हारा एनाकॉन्डा । उसने कहा हाँ काफी दिनों से बिल नही मिला इसे । मैंने कहाँ तो करा दो इसको बिल की सैर तो उसने मेरे हाथ को पकड़ कर बड़े प्यार से अपने लंड परराख दिया और मुझसे पूछा क्या तुम अपने बिल की सैर कराने का मौका इसे दोगी ।
मैं भी यही चाहती थी । मैं उसकी इस बात पर शर्मा गयी । हर्ष थोड़ा सा उठा और उसने पजामे के साथ अपना अंडरवियर भी एक साथ उतार दिया उसका लंड मेरे सामने था मैं बेड पर आराम से लेटी हुई थी वह खड़ा हुआ और हल्का सा झुक कर लंड को मेरे मुँह के पास लेकर खड़ा हो गया मैंने बिना देरी किये उसका लंड लेटे-लेटे ही मुँह में ले लिया । वह मेरे मुँह को चोदने लगा । मैं बिल्कुल रिलैक्स लेटी हुई थी फेर उसने अपना हाथ बढ़ा कर मेरी चुत पर रख दिया और चुत पर हाथ घुमाने लगा मुझे बहुत मजा आ रहा था । वह अब मेरे मुँह को जल्दी-जल्दी चोदने लगा और अपना सारा वीर्य मेरे मुँह में ही छोड दिया मैं उसके वीर्य को एक रण्डी की तरह पी गई । मैंने उसका लंड चाट कर साफ कर दिया और वह अब मेरी चुत की तरफ बढ़ने लगा और मेरी लोअर को उतार दिया मैंने आपको पहले भी बताया था की मुझे अपनी चूत पर बिल्कुल भी बाल पसन्द नही है मैं हर पंद्रह से बीस दिन में अपने बाल साफ करती थी । उसने जैसे ही मेरी चूत को देखा उसने अपने हाथ की सबसे बड़ी वाली उँगली मेरी चूत की लकीर पर मसली और उंगली को अंदर डाल दिया और बाहर निकाल कर उँगली पर लगे मेरे पानी को चाट गया । फिर झुक कर अपनी जीभ से मेरी चुत की चुदाई करने लगा । मेरा बस होने ही वाला था की एक दम से गेट खुलने की आवाज आई हम दोनों हड़बड़ा गए मैंने जल्दी से अपने लोअर को ऊपर किया हर्ष साइड में बैठ गया मेरी माँ सीधा मेरे कमरे में आई उनको पता नही था की हर्ष घर पर हैं माँ हर्ष को देखकर बोली बेटा तुम कब आये हर्ष बस आंटी जी अभी आया हूँ फिर वह दूसरे कमरे में चली गयी ।
मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था . हर्ष मेरी हालत देखकर बोला कोई नही दीदी रात को छत पर आ जाना ये कहकर उसने अपना नंबर मुझे दिया और अब मैं रात का इंतज़ार करने लगी । हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था मैं छत पर पहले ही जाकर खड़ी हो गयी मैंने हर्ष को फ़ोन करके ऊपर बुलाया वह भी जल्दी से ऊपर आ गया वह अपनी छत से कूदकर मेरी छत पर आ गया अभी अंधेरा नही हुआ था तो वह मुझसे बात करने लग गया ।
हर्ष :- आज काफी दिनों बाद बहुत अच्छा लगा ।
मैंने गुस्से में कहा तुम्हारा तो हो गया पर मेरा क्या ।
हर्ष बात को काटते हुए बोला दीदी आज आपकी सारी ख्वाईश पूरी कर दुँगा ।
मैंने उसकी तरफ देखते हुए कहा देखते हैं तुम क्या कर सकते हो । बातों बातों में अंधेरा भी हो गया था उसने चारों तरफ देखकर मुझे दीवार पर लगाया ओर मुझे चूमने लगा और मेरी चुचिया दबाने लगा । मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी हमे ऊपर किसी का डर नही था हर्ष ने अपनी छत पर लगा दरवाजा बंद किया हुआ था । और मेरी माँ पैरो में दर्द होने की वजह से छत पर आती नहीं थी पापा अभी आये नही थे । हम बिना डरे मजे कर रहे थे थोड़ी देर बाद उसने मुझे घुमाया और हल्का सा झुका दिया और नीचे बैठ कर मेरे लोवर उतार दिया और अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया मुझे बहुत मज़ा आ रहा था । काफी देर बाद वह उठा और खड़ा होकर अपना भी लोअर उतार दिया और अपने खड़े लंड पर थूक लगाकर लंड को चूत पर लगाया और एक ही धक्के में पूरा लंड मेरी चुत में उतार दिया हाथों को आगे चुचियो पर लाते हुए जोर जोर से मसलने लगा जैसा इनमे से आज ही सारा दूध निकालेगा और पीछे से धक्के लगाने लगा मुझे बहुत दिनों बाद जबरदस्त लंड का मज़ा मिल रहा था . अगर हर्ष की जगह मेरे पति होते तो वह अब तक झड़ गए होते.हर्ष मुझे लंबी रेस का घोड़ा लग रहा था वह मुझे बहुत बुरी तरह से चोद रहा था मैं भी यही चाहती थी कि कोई मेरी चुत को तस्सली से चोदे और इसी बीच मेरा वीर्य छूट गया था जो मेरी चूत से होता हुआ नीचे टांगो तक आ रहा था पर हर्ष अभी भी मुझे बहुत तेज़ी से चोदे जा रहा था कुछ देर बाद मेरा फिर से हो गया और मेरी चुत में भी दर्द होने लगा था मैंने हर्ष का लंड को निकाला और नीचे घुटनो के बल बैठ कर उसके लंड को चूसने लगी हर्ष ने भी मेरे बालो को पीछे से जोर से पकड़ लिया और मेरे मुँह को चोदने लगा फिर मैं उठी और हर्ष को मेरी गांड पर थूक कर गिला करने के लिए कहा पर वह नीचे बैठ कर मेरी गांड में अपना मुँह डाल कर चाटने लगा और काफी सारा थूक मेरी गांड में छोड़ दिया और लंड को गांड के छेद पर लगाकर हल्के-हल्के से गांड में डालने लगा और लंड पूरा अंदर जाते ही वह मुझे फिर से तेज़ी से चोदने लगा । काफी देर की चुदाई के बाद मेरी टांगे भी दुखने लगी थी पर चूत की खुजली के सामने ये कुछ भी नही था
काफी देर बाद हर्ष की रफ्तार कम हो गयी । और बोला दीदी कहाँ छोडू तो मैंने कहा की चूत में छोड़ दो .वह इतना सुनते ही लंड निकाल कर चूत में डाल कर फिर से मुझे चोदने लगा । मुझे भी मजा आने लगा. कुछ मिनट बाद ही उसकी एक लंबी गर्म पिचकारी मुझे अपने अंदर महसूस हुई फिर तो बहुत सी पिचकारी मुझे अपने अंदर महसूस हुई पर हर्ष ने अभी धक्के मरना बंद नही किया था और साथ ही मैं भी झड़ गयी । थोड़ी देर बाद हर्ष का लंड छोटा होकर बाहर निकल गया हम दोनों ने अपने कपड़े सही करे । मैं काफी खुश थी मैंने कहा वाह हर्ष तुमने तो सही में आज कमाल कर दिया और मैं उसके गले लग गयी उसने भी मुझे बाहों में भर लिया और एक किस माथे पर करी ओर फिर मेरे होंठ चूसने लगा । फिर मैं उसे अलविदा कहकर नीचे आ गयी और अपने कमरे में लेट गयी । थोड़ी देर बाद पिता जी भी आ गए ।
फिर हम ने साथ में खाना खाया और मैं अपने बैडरूम में चली गयी । अपने पति से थोड़ी देर बात करके फिर करीब ग्यारा बजे तक हर्ष से फ़ोन पर बात करी । मैंने उसको कहा की सुबह आ जाना एक्टिवा लेकर । वह भी खुश हो गया और बोला ओक दीदी
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